ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुःशशीभूमिसुतोबुधश्च गुरुश्चशुक्रःशनिराहुकेतवः कुर्वन्तुसर्वेममसुप्रभातम्
रत्नविज्ञान क्या है?
रत्नविज्ञान, रत्नों, उनके प्रकार, संरचना, ऊर्जा, गुणों और ज्योतिष में उनके उपयोग का अध्ययन है।
भारतीय ज्योतिष में यह मान्यता है कि सही रत्न का उपयोग विशिष्ट ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने या ग्रहों के दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। प्रत्येक रत्न की एक विशिष्ट कंपन होती है, जो उस ग्रह से जुड़ी होती है।
रत्नविज्ञान एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो मानव जीवन पर विभिन्न रत्नों के प्रभावों का अध्ययन करता है। अध्ययन करता है । रत्नविज्ञान में ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए विशिष्ट रत्नों को धारण करने की परंपरा है।
प्रत्येक रत्न को एक विशिष्ट ग्रह से जुड़ा माना जाता है और सही रत्न का उपयोग करने से
स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, समृद्धि और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।
रत्न विज्ञान का उल्लेख वेदों, पुराणों और ज्योतिष में मिलता है , और आज भी इसका उपयोग मार्गदर्शन के लिए किया जाता है।