पुष्टिपते नमस्तुभ्य नमः शंकरसूनवे॥ ब्रह्मभूताय देवाय सर्वसिद्धिप्रदाय ते॥
पूजा विधि – वैदिक ग्रंथों के अनुसार विस्तृत जानकारी
वैदिक परंपरा में, पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि ईश्वर से जुड़ने, अपने कर्तव्यों के माध्यम से सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने और आत्म-शुद्धि प्राप्त करने का एक तरीका है। मंत्र, यज्ञ, यज्ञ और अग्नि अनुष्ठानों को आधुनिक पूजा की तुलना में वैदिक पूजा में कहीं अधिक महत्व दिया जाता है।
वैदिक पूजा का उद्देश्य केवल मूर्तियों की पूजा करना ही नहीं है, बल्कि मंत्रों, यज्ञकर्म और अग्निहोत्र के माध्यम से दिव्य शक्तियों का आह्वान करना, उन्हें अर्पित करना और अंत में उनका विसर्जन करना भी है। प्रत्येक क्रिया के साथ विशिष्ट मंत्रों का पाठ किया जाता है।