परीक्षितायां भुवि विघ्नराजं । समर्चयेच्चण्डिकया समेतम् । क्षेत्राधिपं चाष्टदिगीशदेवान् पुष्यैश्च धूपैर्बलिभि: सुखाय ॥
अर्थ: भूमि परीक्षण के बाद गणपति, चंडिका माता, क्षेत्रपाल और अष्टदिक्पाल का पूजन करना चाहिए। इससे वास्तु में स्थायी रूप से सुख और शांति का वास होता है।