“वेदस्य निर्मलं चक्षुर्ज्योतिश्शास्त्रमनुत्तमम्”
ज्योतिष क्या है?
ज्योतिष शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो ग्रहों, नक्षत्रों, राशियों, भावों, दशाओं और गोचरों का अध्ययन करके व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। इस विज्ञान के आधार पर व्यक्ति के भविष्य, स्वभाव, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, विवाह, संतान, शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय के साथ-साथ सफलता और असफलता की भविष्यवाणी की जाती है। ज्योतिष शास्त्र वेदों के छह वेदांगों में से एक है और इसे वेदों की आंखें भी कहा जाता है, क्योंकि यह भूतकाल, वर्तमान और भविष्य का अवलोकन करने में सहायक होता है। इसके तीन मुख्य भाग हैं: सिद्धांत, संहिता और होरा (फलित)। कुंडली के माध्यम से नौ ग्रहों, बारह राशियों, सत्ताईस नक्षत्रों और बारह भावों के अंतर्संबंधों का अध्ययन करके जीवन में संभावित अवसरों और कठिनाइयों को समझा जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र केवल भाग्य बताने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सही निर्णय लेने में मार्गदर्शन करना, संकटों की भविष्यवाणी करना और मंत्रों, दान, रत्नों और व्रतों जैसे उपायों के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।